वर्टिगो एक प्रकार का चक्कर है जिसमें व्यक्ति को घूमने, झुकने या डगमगाने का झूठा एहसास होता है, जबकि वास्तव में वह हिल नहीं रहा होता है। यह केवल हल्का चक्कर महसूस होना नहीं है; बल्कि यह एक परेशान करने वाला एहसास है जिसमें आसपास की चीजें घूमती हुई लगती हैं। लोग इसे अक्सर “चक्कर” या अचानक संतुलन बिगड़ने जैसा बताते हैं। वर्टिगो कभी-कभी बहुत तेज हो सकता है और इससे मतली, घबराहट तथा रोज के काम करने में कठिनाई हो सकती है। यह तब होता है जब आंखों, इनर ईयर और दिमाग से मिलने वाले संकेत (जो आपको संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं) में असंतुलन होता है।
वर्टिगो कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। यह कई अंदरूनी समस्याओं के कारण हो सकता है, खासकर इनर ईयर या दिमाग से जुड़ी समस्याओं के कारण। इसके 40 से अधिक ज्ञात कारण हैं। सही इलाज के लिए सही कारण की पहचान जरूरी है।
वर्टिगो का समय और इसकी अवधि इसके कारण पर निर्भर करती है। बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV) में यह आमतौर पर सिर की खास गतिविधियों जैसे बिस्तर पर करवट बदलने या ऊपर देखने पर होता है और कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक रहता है। मेनिएर्स डिजीज में वर्टिगो अचानक शुरू होता है और कई घंटों तक रह सकता है; साथ में सुनने में कमी या कान में आवाज भी हो सकती है। वेस्टिबुलर न्यूराइटिस, जो आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होता है, कई दिनों तक गंभीर वर्टिगो पैदा कर सकता है। वेस्टिबुलर माइग्रेन में वर्टिगो कुछ सेकंड से लेकर कई दिनों तक रह सकता है और यह सिरदर्द के साथ या बिना भी हो सकता है। सही पहचान और उचित इलाज से ज्यादातर मामलों में वर्टिगो को नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है।
दातर मामलों में वर्टिगो स्थायी नहीं होता है और सही कारण की पहचान होने पर इसका प्रभावी इलाज किया जा सकता है। कई मरीज व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांस के माध्यम से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, जिसमें वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT), BPPV के लिए रीपोजिशनिंग तकनीक, दवाएं, लाइफस्टाइल सलाह और कुछ मामलों में विशेष न्यूरो-ओटोलॉजिकल उपचार शामिल हो सकते हैं।
समय पर पहचान और सही इलाज बहुत जरूरी है। यदि वर्टिगो का इलाज न हो या गलत पहचान हो जाए, तो चक्कर आने के लक्षण बने रह सकते हैं या समय के साथ बिगड़ सकते हैं।
वर्टिगो की जांच में चक्कर और संतुलन की समस्या के असली कारण का पता लगाने के लिए पूरी जांच की जाती है। इसकी शुरुआत मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की जानकारी से होती है, जिसके बाद शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है।
समस्या के मुख्य कारण का पता लगाने के लिए विशेष टेस्ट किए जाते हैं। इनमें वीडियोनिस्टैग्मोग्राफी (VNG) द्वारा आंखों की गतिविधियों की जांच, वीडियो हेड इम्पल्स टेस्ट (vHIT) द्वारा सेमिकर्कुलर कैनाल्स की कार्यक्षमता की जांच और सब्जेक्टिव विजुअल वर्टिकल (SVV) द्वारा दिमाग की संतुलन संबंधी जांच शामिल हो सकती है। अतिरिक्त टेस्ट इनर ईयर और नर्व फंक्शन की जांच में मदद करते हैं, जबकि सुनने की क्षमता की जांच के लिए ऑडियोमेट्री की जाती है। केवल कुछ असाधारण मामलों में MRI या CT स्कैन की सलाह दी जाती है ताकि संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की संभावना को खारिज किया जा सके। उचित ट्रीटमेंट प्लान के लिए सही कारण की पहचान बहुत जरूरी है।
चक्कर आने (वर्टिगो) की स्थिति में तुरंत कदम उठाना ज़रूरी है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और लक्षणों की तीव्रता कम हो सके। जैसे ही चक्कर महसूस हो, तुरंत बैठ जाना या लेट जाना जरूरी है ताकि गिरने से बचा जा सके। सिर को अचानक हिलाने से बचना और शांत रहना असुविधा को कम करने में मदद करता है। सिरदर्द या नजर में बदलाव जैसे अन्य लक्षणों पर ध्यान देना भी डॉक्टरों को कारण समझने में मदद करता है।
लंबे समय का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। BPPV वाले मरीजों में एप्ली या ज़ूमा जैसी कैनालिथ रीपोजिशनिंग तकनीक इनर ईयर के हटे हुए क्रिस्टल्स को सही जगह पहुंचाने में मदद करती है और अक्सर जल्दी राहत देती है। वेस्टिबुलर सप्रेसेंट जैसी दवाओं का उपयोग तीव्र दौरों में थोड़े समय के लिए किया जा सकता है, लेकिन आमतौर पर लंबे समय तक इनका उपयोग नहीं किया जाता जब तक डॉक्टर सलाह न दें।
कई मामलों में वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT) बहुत फायदेमंद होती है। इसमें प्रशिक्षित और विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में बैलेंस और नजर स्थिर रखने वाली विशेष एक्सरसाइज कराई जाती हैं, जो दिमाग को सामंजस्य बिठाने और क्षतिपूर्ति (कंपनसेट) करने में मदद करते हैं, खासकर वेस्टिबुलर न्यूराइटिस या लंबे समय से चल रहे चक्कर में। इसके अलावा जीवनशैली (लाइफस्टाइ) और खानपान में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग, मेडिटेशन या काउंसलिंग के माध्यम से तनाव कम करना, नियमित नींद लेना, पर्याप्त पानी पीना और ब्लड शुगर को स्थिर रखना लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। मेनिएर्स डिजीज जैसी स्थितियों में नमक कम लेने की सलाह दी जाती है। कैफीन, शराब और कुछ विशेष खाने की वस्तुओं से बचना भी दोबारा वर्टिगो होने से रोक सकता है।
हां। तनाव और चिंता वर्टिगो के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं और उन्हें और भी गंभीर बना सकते हैं। खासकर वेस्टिबुलर माइग्रेन या लंबे समय से चल रहे चक्कर में तनाव को नियंत्रित (कंट्रोल) करने की तकनीकें बहुत जरूरी होती हैं।
नहीं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस गर्दन से जुड़ी एक डीजनरेटिव समस्या है, लेकिन वर्तमान मेडिकल समझ के अनुसार यह सीधे वर्टिगो का कारण नहीं बनती।
क्या वर्टिगो खतरनाक होता है?
वर्टिगो आमतौर पर जानलेवा नहीं होता है, लेकिन यह परेशान करने वाला और डर पैदा करने वाला हो सकता है, खासकर जब यह अचानक हो। बुजुर्गों में इससे गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिससे गंभीर चोट लग सकती है। हालांकि ज्यादातर कारण सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर या न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत भी हो सकता है। यदि वर्टिगो के साथ अचानक तेज सिरदर्द, अस्पष्ट बोलना, नजर कम होना या हाथ-पैरों में कमजोरी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच गंभीर कारणों को पहचानने और सही इलाज शुरू करने में मदद करती है।
क्या वर्टिगो से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है?
वर्टिगो सीधे हाई ब्लड प्रेशर का कारण नहीं बनता है। हालांकि, इसका उल्टा संबंध अधिक आम है; यानी ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, किसी बीमारी या दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण चक्कर या वर्टिगो हो सकता है। कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं, खासकर जो खून के बहाव को या शरीर में पानी के स्तर को प्रभावित करती हैं, संतुलन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। ब्लड प्रेशर और वर्टिगो के लक्षणों की एक साथ निगरानी करने से पैटर्न की पहचान करने और उचित इलाज में मदद मिल सकती है।
हालांकि केवल खानपान से वर्टिगो ठीक नहीं होता, लेकिन मेनिएर्स डिजीज और वेस्टिबुलर माइग्रेन जैसी स्थितियों में यह महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभाता है। खानपान में कुछ विशेष बदलाव करने से वर्टिगो के दौरों के बार-बार होने तथा उनकी गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है। नमक कम लेना इनर ईयर में तरल दबाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। कैफीन और शराब कम करना भी कुछ लोगों में लक्षण बढ़ने से रोक सकता है। पर्याप्त पानी पीना और पूरे दिन ब्लड शुगर को स्थिर रखना संतुलन और ऊर्जा के लिए जरूरी है।
व्यक्तिगत फूड ट्रिगर्स की पहचान करके उनसे बचना भी फायदेमंद हो सकता है, खासकर माइग्रेन में।
हां, वर्टिगो के साथ कभी-कभी सिरदर्द हो सकता है, खासकर वेस्टिबुलर माइग्रेन जैसी स्थितियों में जहां दोनों लक्षण आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में चक्कर या घूमने जैसे एहसास के साथ माइग्रेन का सिरदर्द, तेज रोशनी या आवाज के प्रति संवेदनशीलता और मतली भी हो सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर प्रकार का वर्टिगो सिरदर्द से जुड़ा नहीं होता है। सिरदर्द का होना या न होना डॉक्टरों को कारण पहचानने और सही इलाज तय करने में मदद करता है।
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