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वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया (Vestibular Paroxysmia)

यह एक clinical syndrome है जो vestibular nerve के दबाव के कारण होता है। इसको पहचानने का मुख्य लक्षण यह है कि रोगी को कभी-कभी चक्कर आते है। इसका लक्षण, कारण और प्रभावी उपचार के बारे में नीचे और जानें।

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वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया क्या है?

यह एक clinical syndrome है जो vestibular nerve के compression के कारण होता है। इसको पहचानने का मुख्य लक्षण यह है कि रोगी को कभी-कभी चक्कर (अधिक जानकारी) आते है।

वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया के कारण

Vestibular nerve संपीडन (compression) या खराब होने के निम्न कारण हो सकते है।

  • Blood vessels मे microvascular compression
  • Vestibualr Neuritis
  • कोई Tumor जैसे Acoustic Neuroma
  • Radiation (विकिरण)
  • 8th Nerve की सर्जरी

Hicrovascular compression इसका सबसे आम कारणों मे से एक है।

वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया के लक्षण

रोगी दिन मे कई बार चक्कर आने की शिकायत कर सकता है जो कि कुछ सेकण्ड से कई मिनट तक चल सकते है।

वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया कि जांँचे

MRI with Gadolinium enhancement होने पर 3D MRI with FT- FLSS या CLSS करवाने की सलाह दी जाती है।

  • VNG/ENG – Hufner के अनुसार 66 प्रतिशत लोगो मे चवेपजपअम positive होती है।
  • Audiometry – 50 प्रतिशत लोगो मे positive होती है।
  • Fasting Blood sugar – sugar की जाॅंच (खाली पेट ब्लड शुगर की जाॅंच)

वेस्टिबुलर पैरोक्सिमिया के उपचार

Vestibular paroxysmia cochleo vestibular nerve के compression मे होते। चिकित्सक Carbanazepine दवा की सलाह देते है। इन दवाओं के प्रति रोगी का response भी उपकरण के रूप मे कार्य करता है। vestibular suppressants इस स्थिति मे प्रभावी नही होते। अगर दवाआंे से आराम नही मिलता तो चिकित्सक द्वारा endoscopy से Microvascular decompression किया जा सकता है।

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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