टिन्निटस

कानों में गुंजन के महसूस होने को टिन्निटस कहते हैं। टिन्निटस के कारण और उसके उपचार की विधियों को जानने के लिए इस पूरे विवरण को पढ़ें।

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टिन्निटस क्या है?

मरीज़ द्वारा कान में गुंजन या किसी अतिरिक्त ध्वनि के अनुभव करने को टिन्निटस कहते हैं। टिन्निटस से ग्रसित मरीज़ इसका वर्णन अक्सर लगातार या रह-रह कर गूंजने की, सीटियाँ बजने की, चहचहाने की या फ़ुफ़कारने की ध्वनियों के रूप में करते हैं। कुछ मरीज़ अपने कानों में व्हूश जैसी, भिनभिनाने जैसी इत्यादि और भी आवाजें सुन सकते हैं। टिन्निटस एक या दोनों कानों को प्रभावित कर सकता है।

कानों में सुनाई देने वाली ध्वनियाँ धीमे से लेकर बहुत तेज़ हो सकती हैं और उनके स्वरमान (pitch) और तीव्रता (volume) या तो लगातार एक समान या परिवर्तनशील हो सकते हैं। आवाजों से होने वाली परेशानी तब ज्यादा महसूस होती है जब मरीज़ ऐसे शांत वातावरण में सोने या कार्य करने की कोशिश कर रहा हो जहां पार्श्व ध्वनियाँ कम हों। इसके विपरीत कुछ मरीज़ ध्वनि के प्रति अतिसंवेदनशील बन जाते हैं जिसे हाइपरऐक्यूसिस (hyperacusis) कहते हैं।

हालांकि टिन्निटस के कारण प्रत्यक्ष रूप से श्रवण हानि नहीं होती लेकिन यह ध्यान देने व सुनने की क्षमताओं को निश्चित ही बाधित कर सकता है। यदि इस समस्या पर लंबे समय तक ध्यान न दिया जाए तो इससे मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

हमारे कान का भीतरी हिस्सा शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है, ध्वनि के संग्राहक (receptor) के रूप में कार्य करता है और मस्तिष्क तक सिग्नलों को संप्रेषित करता है। शोर भरी ध्वनियाँ यदि बहुत तेज़ हों तो वे कान के भीतरी हिस्से की ध्वनि के प्रति संवेदनशील कोशिकाओं को अस्थाई या कभी-कभी स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं।

कान के भीतरी हिस्से से ध्वनि के संचालन में या केन्द्रीय स्नायुतंत्र (Central Nervous System) द्वारा ध्वनि के प्रसंस्करण (processing) में परेशानी होने के कारण टिन्निटस हो सकता है।

टिन्निटस के कारण

  • कान का इन्फेक्शन
  • साइनस इनफेक्शन
  • मैल जमा होने के कारण कानों का बंद होना
  • मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease)
  • वृद्धावस्था
  • शोर भरी आवाजों के लगातार संपर्क में आना
  • शोर भरी आवाजों के अचानक संपर्क में आना
  • सर या गर्दन की चोट
  • VIII कपाल तंत्रिका (VII cranial nerve) को प्रभावित करने वाला ट्यूमर
  • ऐस्पिरिन (aspirin), क्विनाइन (quinine) और क्लोरोक्वाइन (chloroquine) के, कुछ शामक दवाओं, ऐण्टि डिप्रैसैण्ट दवाओं, दर्द निवारक दवाओं, ऐण्टिबायोटिक दवाओं तथा डायुरैटिक दवाओं के दुष्प्रभाव
  • जबड़ों के नुकसान के कारण हुआ जोड़ों का टैंपोरोमैंडिब्युलर (temporomandibular) विकार
  • ऑटोस्क्लैरौसिस (otosclerosis) – एक ऐसी स्थिति जिसमें कान के भीतरी हिस्से की छोटी हड्डियां अचल बन जाती हैं
  • हाइपोथाइरॉएडिज़्म (hypothyroidism), मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ऐनीमिया (anaemia), हृदय संबंधी समस्याओं, ऑटोइम्यून विकारों (autoimmune disorders) और रक्तवह तंत्र के विकारों (circulatory disorders) जैसी चिकित्सकीय समस्याएं
  • अत्यधिक तनाव एवं थकान
  • शराब या कैफी़नयुक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन तथा सिगरेट पीना टिन्निटस के मरीज़ की हालत को बिगाड़ सकते हैं
  • माइग्रेन का सरदर्द

टिन्निटस के कई कारण हैं। कभी यह स्वतंत्र रूप से होने वाली एक ही समस्या हो सकती है जो उत्प्रेरित हो या फिर किसी आधारभूत चिकित्सा समस्या की सूचक भी हो सकती है। उस चिकित्सा समस्या का निदान हो जाने पर टिन्निटस का भी समाधान हो जाता है।

वर्टिगो (vertigo) या चक्कर आने की समस्या को उत्पन्न करने वाले विकारों से टिन्निटस को जोड़ा जा सकता है।

ऐसे लोगों को टिन्निटस होने का खतरा होता है जो लंबे समय तक शोरगुल भरे माहौल में काम करते हैं जैसे बड़ई (carpenter), शोर करने वाली मशीनों का उपयोग करने वाले मरम्मत कर्मी, रॉक संगीतकार, पायलट या अन्य ऐसे कर्मी जिनका संपर्क अचानक होने वाली आवाज़ों से होता है या जो शोरगुल भरे माहौल में लगातार काम करते हैं। उच्च स्वर के संगीत को लंबे समय तक सुनने वाले लोगों में एक अंतराल के बाद टिन्निटस विकसित हो सकता है।

वस्तुनिष्ठ एवं व्यक्तिनिष्ठ टिन्निटस

व्यक्तिनिष्ठ टिन्निटस में केवल टिन्निटस के मरीज़ को ही घंटियाँ बजने की ध्वनियाँ या अन्य समरूप ध्वनियाँ कान में सुनाई देती हैं।

इसके विपरीत, वस्तुनिष्ठ टिन्निटस में डॉक्टर भी स्टैथैस्कोप (stethoscope) की मदद से मरीज़ के कान में टिन्निटस को सुन सकते हैं।

NeuroEquilibrium™ में हमने टिन्निटस की पहचान और उपचार के लिए जाँच और चिकित्सा के उन्नत उपकरण विकसित किए हैं।

ऑटोलॉजिस्ट (Otologists), न्यूरोटोलॉजिस्ट (neurotologists), ऑटोलैरिंजोलॉजिस्ट (otolaryngologists) तथा ऑडियोलॉजिस्ट (audiologists) इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं जो टिन्निटस और उसकी गंभीरता की पहचान विभिन्न शारीरिक एवं व्यवहार संबंधी जाँचों द्वारा आपकी श्रवण शक्ति को जांचने के लिए करते हैं।

टिन्निटस की पहचान करने के लिए जाँच

1. विजुवल ऐनालॉग स्केल (Visual Analogue Scale)

इस जाँच में मरीज़ को कान के अंदर होने वाले शोर की तीव्रता को 0 से 10 के पैमाने पर आँकने को कहा जाता है। व्यक्तिनिष्ठ टिन्निटस के कारण अपने कान के भीतर घण्टी बजने की ध्वनि को मरीज़ उसकी असल तीव्रता से अधिक अनुभव करते है। 0 से 10 के डैसिबैल पैमाने पर तीव्रता को जाँचने से डॉक्टरों को टिन्निटस की गंभीरता को समझने में मदद मिलती है।

2. श्रवणमिति (Audiometry)

यह जाँच मरीज़ की श्रवण शक्ति का आकलन करने के लिए की जाती है। यदि श्रवण शक्ति का ह्रास पाया जाता है तो श्रवण शक्ति के ह्रास का प्रकार और उसकी गंभीरता को मापा जाता है।

3. टिन्निटस मिलान (Tinnitus Matching)

विभिन्न स्वरमानों (pitches) की ध्वनियों को मरीज़ों को सुनाया जाता है और उन सब में से उन्हें उस ध्वनि को चुनने को कहा जाता है जो उन्हें अपने कानों के भीतर महसूस होने वाली ध्वनि से मेल खाती हुई लगती हों। डॉक्टरों को मरीज़ के टिन्निटस की आवृत्ती के स्तर को समझने में ऐसे स्वरमान (pitch) की पहचान जो काफ़ी हद तक उस स्वरमान के समान हो जिसे मरीज़ अपने कानों में सुनता है, से मदद करती है।

4. तीव्रता मिलान जाँच (Loudness Match Test)

इसमें मरीज़ को अपने कान में सुनाई देने वाली ध्वनि की तीव्रता का मिलान करने को कहा जाता है । इस जाँच से डॉक्टर को टिन्निटस की ध्वनी की रेन्ज को समझने में सहायता मिलती है।

5. यूस्टाशियन ट्यूब फंक्शन के साथ इम्पीडैन्स श्रवणमिति जाँच (Impedance audiometry with Eustachian tube function tests)

कान के मध्य भाग के दबाव को, स्टैपीडियल रिफ़्लैक्सिस को तथा ET फंक्शन को निर्धारित करने के लिए यह जाँच की जानी चाहिए।

टिन्निटस के उपचार के प्रभावी तरीक़े

टिन्निटस के आधारभूत कारण को निर्धारित करना महत्वपूर्ण होता है।

1.कान में अत्यधिक मैल जमा हो जाने के कारण होने वाला टिन्निटस

कान को सुरक्षित रखने के लिए तथा उसे चिकना बनाए रखने के लिए उसमें मैल उत्पन्न होता है। ईयर बड्स (ear buds) की सहायता से कानों की सफाई करने से मैल कान के और भीतर चला जाता है जिससे कान की नली अवरुद्ध हो जाती है। ऐसा करने के बजाय मरीज़ को अपने नज़दीकी ENT डॉक्टर के पास कान का मैल निकलवाने के लिए जाने का प्रोत्साहन देना चाहिए।

2.कान के इन्फैक्शन के कारण होने वाला टिन्निटस

इसमें डॉक्टर कान के इन्फैक्शन को कम करने के लिए ऐण्टिबायोटिक दवाएं लेने की सलाह देंगे।

3. टैंपोरोमैंडिब्युलर जोइण्ट (TMJ) (temporomandibular joint) विकार के कारण होने वाला टिन्निटस

किसी भी तरह का अनुचित दबाव या क्षति जोड़ को नुकसान पहुँचा सकते हैं जिससे टिन्निटस रोग हो सकता है। इस समस्या का और्थोडॉण्टिस्ट (orthodontist), डैण्टिस्ट (dentist) या ENT डॉक्टर सफलतापूर्वक उपचार कर सकते हैं।

4. टिन्निटस के उपचार के लिए दवाएँ

मरीज़ों को ध्वनियों से परिपूर्ण वातावरण में रहने की सलाह दी जाती है।

5. ऐण्टि-ऐंग्ज़ाइटी (anti-anxiety) या ऐण्टिडिप्रैसैण्ट (antidepressant) दवाएँ

टिन्निटस के उपचार के लिए डॉक्टरों द्वारा अक्सर ऐण्टि-ऐंग्ज़ाइटी (anti-anxiety) या ऐण्टिडिप्रैसैण्ट (antidepressant) दवाएँ लेने की सलाह दी जाती है।

टिन्निटस के उपचार के लिए उपकरण

1. श्रवण सम्बन्धी उपकरण (hearing aids)

अच्छे से फिट होने वाला एक श्रवण सम्बन्धी उपकरण कान में विचलित करने वाली ध्वनियों को कम करके प्रभावी तरीक़े से सुनने में सहायक होता है।

2. मास्किंग यन्त्र (masking devices)

इन यन्त्रों को शोर का दमन करने वाले यन्त्र (noise suppression devices) भी कहा जाता है। ये यन्त्र श्रवण सम्बन्धी उपकरणों (hearing aids) जैसे ही होते हैं। मरीज़ का ध्यान टिन्निटस के कारण उत्पन्न होने वाली घण्टी की ध्वनि से भटकाने के लिए यह यन्त्र एक अतिरिक्त ध्वनि को बजाता है। तीव्रता और स्वरमान का मिलान करने वाली जाँचों को पूरा करने के बाद डॉक्टर इस यन्त्र की आवृत्ती (frequency) को सैट करता है ताकि यन्त्र का स्वरमान मरीज़ द्वारा अनुभव की जाने वाली टिन्निटस की ध्वनि के स्वरमान से मेल खाए।

3. टिन्निटस उपकरण

यह उपकरण श्रवण सम्बन्धी उपकरणों (hearing aids) एवं मास्किंग यन्त्रों (masking devices) का सम्मिश्रण होता है।

4. टिन्निटस रीट्रेनिंग थेरेपी

यह एक ऐसी चिकित्सा है जो मरीज़ों को परेशान करने वाले कान के भीतर के शोर को अवचेतन स्तर पर सामान्य समझने का आदी कर देती है जिससे कान के भीतर होने वाली उन आवाज़ों से मरीज़ का चेतन मन परेशान न हो। TRT के दो चरण होते हैं:

  • टिन्निटस यन्त्र का इस्तेमाल
  • किसी अनुभवी डॉक्टर द्वारा परामर्श सत्र संचालित करना

टिन्निटस के उपचार के लिए यह चिकित्सा बहुत कारगर होती है और इसके परिणाम एक या दो वर्षों में दिखाई देने लगते हैं।

5. बायोफीडबैक

यह विश्राम करने का एक ऐसा तरीका है जो मरीज़ों को कान के भीतरी हिस्से में होने वाले शोर से उत्पन्न तनाव के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने एवं उसके प्रबंधन में मदद करता है।

6. संज्ञानात्मक चिकित्सा

टिन्निटस के उपचार के लिए मास्किंग उपकरणों और दवाइयों के उपयोग के साथ-साथ मरीज़ों को गहन परामर्श प्रदान करना अत्यंत लाभदायक साबित हुआ है।

7. कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implants)

गंभीर से लेकर अत्यधिक बहरेपन का उपचार करने के लिए यह यन्त्र मस्तिष्क तक विद्युतीय सिग्नल भेजता है। यदि टिन्निटस के मरीज़ को अत्यधिक श्रवण हानि हुई हो तो यह चिकित्सा उनको प्रभावी तौर से स्थाई राहत दिला सकती है. हालांकि जिन मरीज़ों को केवल टिन्निटस की शिकायत हो और श्रवण हानि नहीं हुई हो, उन्हें यह उपचार कराने की सलाह नहीं दी जाती।

8. व्हाइट नौइज़ (white noise) उत्पन्न करने वाली मशीनें

कान में होने वाले शोरगुल से मरीज़ का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें बारिश के गिरने का या नदी या समुद्रा की आवाज़ का या इसी से मिलती जुलती अन्य किसी आवाज़ वाला पार्श्व संगीत सुनने की सलाह दी जाती है।

टिनिचस के वैकल्पिक उपचार

टिनिचस को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए आप और क्या क्या कर सकते हैं?

1. धूम्रपान छोड़ दें

धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता है। टिन्निटस के मरीज़ों के लिए ये और भी ख़तरनाक होता है। धूम्रपान के कारण सुनने में सहयाता करने वाली और हमारे शरीर को उत्तेजित करने वाली संवेदनशील श्रवण तंत्रिका कोशिकाओं तक जाने वाली रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। इस क्रिया के कारण कानों में सुनाई देने वाली आवाज़ों का स्तर बहुत बढ़ जाता है।

2. हल्का संगीत बजायें

यदि टिन्निटस आपको बहुत परेशान कर रहा है, तो पृष्ठभूमि में हल्का संगीत बजाने से बहुत मदद मिलती है। इससे आप टिन्निटस पर ध्यान ना देकर अपनी दैनिक क्रियाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

3. ट्रिगर्स (triggers) से बचें

कुछ निश्चित खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और दवाइयाँ लेने से कई मरीज़ अपनी टिन्निटस की समस्या को और बिगड़ता हुआ पाते हैं। इसलिए अपने कानों में सुनाई देने वाली ध्वनि को स्वयं को परेशान करने से बचने के लिएसबसे उत्तम है की आप ऐसे ट्रिगर्स से हमेशा बचें।

4. अपने कानों का बचाव करें

यदि आप कॉन्सर्ट (concert) या पब (pub) जैसी किसी शोरगुल भारी जगह पर हैं या कोई ऐसा कार्य कर रहे हैं जो शोर उत्पन्न कर रहा हो (पावर ड्रिल मशीनों का उपयोग, फ़ैक्टरियों का काम या अत्यधिक शोर करने वाले वैक्यूम क्लीनरों का उपयोग) तो कानों को ढकना या इयर प्लग्ज़ का इस्तेमाल करना ना भूलें।

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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