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वर्टिगो (vertigo) के व्यायाम और घरेलू उपचार

वर्टिगो (vertigo) का या चक्कर आने की समस्या का आधारभूत कारण जानने के लिए उनका मूल्याँकन करना आवश्यक है।

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वर्टिगो (vertigo) का या चक्कर आने की समस्या का आधारभूत कारण जानने के लिए उनका मूल्याँकन करना आवश्यक है।

वर्टिगो भीतरी कान की या मस्तिष्क की समस्याओं के कारण होता है। जब कान का भीतरी हिस्सा किसी चोट, इनफ़ैक्शन (infection) या अन्य कारण से प्रभावित होता है तब व्यक्ति वर्टिगो (चक्कर आने) की समस्या को अनुभव करता है।

कान के भीतरी हिस्से की समस्याएँ जो वर्टिगो का कारण बनती हैं

मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease):

कान में अत्यधिक तरल या द्रव जमा हो जाने के कारण मैनीएरेज़ रोग होता है जिससे वर्टिगो (vertigo) के साथ ही श्रवण हानि और कान बंद होने की भावना उत्पन्न हो सकती हैं।

बिनाइन पैरोक्सिसमल पोज़िश्नल वर्टिगो (Benign Paroxysmal Positional Vertigo (BPPV)):

बिनाइन पैरोक्सिसमल पोज़िश्नल वर्टिगो बीमारी अंदरूनी कान में कैल्शियम की पथरी बनने से होती है। इस बीमारी में करवट बदलने से या ऊपर-नीचे सिर करने पर चक्कर कुछ सेकंड के लिए आता है।

वैस्टिब्यूलर न्यूराइटिस (vestibular neuritis):

यह वायरल इन्फ़ैकशन (viral infection) के कारण हुआ कान का इन्फ़ैकशन (infection) है जो कान के भीतरी हिस्से की नसों को सुजा देता है। यह नसें मस्तिष्क तक संतुलन बनाये रखने के लिए सिग्नलों को भेजती हैं। इस तरह के चक्कर कई दिन तक रह सकते हैं।

वर्टिगो (vertigo) के अन्य कारण

वर्टिगो के कारण असंतुलन और चक्कर आने या सर के चकराने की अनुभूति हो सकती है। इसके आधारभूत कारण के अनुसार यह कुछ सैकैन्डों से लेकर कुछ मिनटों या घण्टों या फ़िर दिनों तक भी रह सकता है।

वर्टिगो का मरीज़ चक्कर आने की भावना को दिन के किसी भी समय महसूस कर सकता है; सोते समय, जागते समय, चलते हुए, सर को ऊपर, नीचे या किसी एक ओर झुकाते वक़्त इत्यादि। वर्टिगो अपने आप में जानलेवा नहीं होता लेकिन इसके कारण मरीज़ को इतनी ज़्यादा परेशानी हो सकती है कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो सकती है। चक्कर के वक़्त मरीज़ के गिरने का और चोट लगने का ख़तरा बना रहता है।

वर्टिगो का या चक्कर आना की समस्या का कारण जानने के लिए उनका मूल्याँकन करना आवश्यक है और फ़िर दवाइयों, व्यायामों और कुछ घरेलू नुस्खों को काम में लाकर इसका उपचार करके राहत पाई जा सकती है।

इनमें से किसी भी उपचार को आज़माने से पहले आप हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ज़रूर करें। डाइग्नॉस्टिक टेस्ट (diagnostic tests) करने के बाद वे आपको वर्टिगो को नियंत्रित करने के प्रभावी तथा स्थाई समाधान के लिए उपयुक्त व्यायाम एवं उपचार सुझा सकते हैं।

वर्टिगो (vertigo) के व्यायाम

इन्हें वैस्टिब्यूलर रीहैबिलिटेशन व्यायाम (vestibular rehabilitation exercises) भी कहा जाता है और वर्टिगो से राहत पाने के लिए डॉक्टर इन व्यायामों को करने की सलाह देते हैं। यह व्यायाम केन्द्रीय स्नायुतंत्र (Central Nervous System) को उत्तेजित करके कान के भीतरी हिस्से की समस्याओं के कारण हुई शरीर के संतुलन की हानि को ठीक करने में मदद करते हैं।

वैस्टिब्यूलर रीहैबिलिटेशन थैरेपी (vestibular rehabilitation therapies) आँखों व शरीर की स्थिरता को सुधारकर बेहतर संतुलन बनाने में सहायता करती है।

वर्टिगो उत्पन्न करने वाली आधारभूत बीमारी के आधार पर और मरीज़ की आयु, वज़न, घुटने, पीठ या गर्दन की समस्याओं या इससे जुड़ी अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर वैस्टिब्यूलर (vestibular) व्यायाम किए जाते हैं। हम कस्टमाइज़्ड वैस्टिब्यूलर रीहैबिलिटेशन थैरेपी (customized vestibular rehabilitation therapy) प्रदान करते हैं।

वर्टिगो (vertigo) के लिए निर्धारित कुछ व्यायाम निम्नलिखित हैं:

तीव्र नेत्र संचालन (rapid eye movement)

  • सीधा बैठ जाएँ
  • 20 बार ऊपर और नीचे देखें
  • 20 बार बाएँ से दायें की ओर देखें
  • आँखों को चलाते समय अपने सर को न हिलने दें
  • सीधे हाथ की index finger को अपने nose tip पर touch करें, फिर धीरे-धीरे finger की तरफ देखते हुए उँगली को दूर ले जाएँ। ऐसा दोनों हाथों से हर direction में करें।

सिर व गरदन का व्यायाम

  • एक हाथ को सीधा रख कर बैठ जाएँ और अपनी आँखों को अपने अँगूठे पर केन्द्रित करें।
  • अँगूठे को एक ओर से दूसरी ओर को चलाएं और अपने सर को भी इसके साथ ऐसे ही चलाएं।
  • इस व्यायाम को पुनः करें लेकिन इस बार अँगूठे को ऊपर नीचे चलाएं और उसके साथ सर को भी चलाएं। इसे 20 बार करें।
  • इस व्यायाम को हर रोज़ 5 मिनटों तक करें।

चलते समय आँखों के व्यायाम

  • इस व्यायाम को करने से पहले सुनिश्चित कर लें की आपके रास्ते में कोई खतरनाक कोने या वस्तुएं नहीं हैं।
  • चलना प्रारांभ करें।
  • अपनी आँखों को कुछ सैकिंडों के लिए बंद करें और फिर खोलें।
  • इस व्यायाम को हर रोज़ 5 मिनटों तक करें।

कंधों का सिकोड़ना

  • सीधे बैठ जाएँ।
  • अपने कंधों को 20 बार सिकोड़ें।
  • इसके बाद अपने कंधे को 20 बार बाएँ से दाएँ और दाएँ से बाएँ मोड़ें।
  • कंधों को आगे, पीछे, ऊपर व नीचे करें – 10 बार।

बैठना और खड़े होना

  • किसी बैड या कुर्सी पर सीधे बैठें और फ़िर धीरे धीरे खड़े हों।
  • ऐसा 20 बार करें। शुरुवात में आपको यह व्यायाम आँखें खोलकर करना चाहिये। जब आपको लगे कि आपका संतुलन सुधर रहा है, तब आप इस व्यायाम को आँखें बन्द करके कर सकते हैं।

बॉल को पास करना

  • सीधे बैठ जाएँ और किसी बॉल को अपनी आँखों के स्तर से ऊपर रखते हुए हर रोज़ एक हाथ से दूसरे हाथ को 10 बार पास करें।

पैर की उंगलियों को छूएं

  • अपने पैर की उंगलियों को छूने के लिए नीचे की ओर झुकें और इस दौरान अपना ध्यान अपने सर की चाल पर केंद्रित करें।
  • कुर्सी पर बैठें, फिर एक पैर के घुटने को सीधा करें और 10 सेकंड रोकें। फिर वापस पहली position में ले आएँ। ऐसा दोनों पैरों से 10-10 बार करें।
  • ऐसा प्रतिदिन 5 से 10 बार करें।

किसी वर्टिगो विशेषज्ञ से परामर्श किए बिना ऐप्ले क्रिया, सेमौंट क्रिया या ब्रैन्ट डैरॉफ़ व्यायाम (deep head hanging) इत्यादि करने का प्रयास ना करें।

NeuroEquilibrium™ के विशेषज्ञ थैरैपिस्ट आपके व्यायामों की निगरानी और मार्गदर्शन करेंगे। इससे आपको अपने सुधार पर नज़र रखने में मदद मिलेगी और आपको अपने साथ लगातार एक मार्गदर्शक मिल जाएगा।

वर्टिगो के लिए विभिन्न व्यायामों को जानने के बाद चलिए अब कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में जानते हैं जो वर्टिगो के आवेग को नियंत्रण में रखने में प्रभावी होते हैं।

वर्टिगो के घरेलू उपचार

    • योग, ध्यान और विश्राम जैसी प्राचीन विधाओं के प्रयोग से वर्टिगो काफ़ी हद तक घट सकता है।
    • खान-पान में सावधानियाँ बरतें
      • कम नमक वाला भोजन – मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) में मददगार होता है। और वैस्टिब्यूलर माइग्रेन (vestibular migraine) के मरीज़ों को कम नमक और ज़्यादा पोटाशियम वाला भोजन लेने की सलाह दी जाती है। इन मरीज़ों को चाय कम लेना चाहिए।
      • कभी कभी कम ब्लड शुगर होने के कारण भी चक्कर आने की समस्या हो जाती है। ऐसे में जल्दी से एक चौक्लेट या शूगर और कार्बोहाइड्रेट से भरा कोई हल्का भोजन ग्रहण करें।
      • शराब पीने से बचें और कैफ़ीन का सेवन कम कर दें।

एक नियमित जीवनचर्या का पालन करने की कोशिश करें – जिसमें समय से खाना और सोना ज़रूर शामिल हों।

स्क्रीन के सामने कम समय बितायें – टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, फ़ोन या अन्य एलेक्ट्रोनिक उपकरणों के सामने घंटों घंटों समय बिताने से संतुलन तंत्रिका उत्तेजित हो सकती है।

वर्टिगो के मरीज़ों के इलाज के लिए NeuroEquilibrium™ में सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर उपलब्ध हैं। आपको इस बारे में राय दी जाएगी की घर पर या कार्यस्थल पर वर्टिगो के दौरे पड़ने पर स्वयंकी कैसे देख-भाल करें।

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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