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आहार द्वारा चक्कर (वर्टिगो) से बचाव

जो आहार, हम ग्रहण करते हैं उसका हमारे स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है| सही आहार का चुनाव, बीमारी के स्वरूप तथा उसके बढ़ने की गति को नियंत्रित करता है| चक्कर की समस्या से पीड़ित रोगी के आहार में थोड़ा सा भी बदलाव उनकी समस्या को बढ़ा और घटा सकता है, साथ ही तकलीफ़ पैदा करने वाले लक्षणों को भी प्रभावित करता हैं|

चक्कर (Vertigo or dizziness) एक लक्षण मात्र है जो कान के भीतरी हिस्से, तंत्रिका तंत्र, और मस्तिष्क में होने वाले 40 विभिन्न प्रकार की बीमारियों की वजह से हो सकता है| यह बहुत महत्वपूर्ण है कि चक्कर की समस्या का सही कारण का पता लगाया जाए, तभी इस बात को समझा जा सकता है की आहार में कौन से बदलाव मददगार हो सकते हैं| बीमारी की सही जांच के लिए अपने निकटतम मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र चिकित्सा (न्यूरो इक्वीबिलिरियम) क्लीनिक पर जाएं|

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि निदानार्थ परीक्षण (diagnostic test) के द्वारा चक्कर की समस्या के कारण का पता लगाया जाए, जिसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टर जांच के नतीजों पर आधारित दवा, पुनर्वास चिकित्सा (rehabilitation therapy) और उचित आहार की सलाह देंगे| यह एक प्रकार का वेस्टिबुलर विकार (vestibular disorders) है जो कान की भीतरी हिस्से से शुरू होता है और असंतुलन तथा चक्कर की समस्या उत्पन्न करता है| इसकी वजह से दृष्टि तथा सुनने से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं| चक्कर की समस्या का सही कारण का पता लगाना जरूरी है, ताकि इस बात को समझा जा सके की आहार में कौन से बदलाव मददगार हो सकते हैं|

अगर आप चक्कर की समस्या से पीड़ित हैं, तो अपने डॉक्टर की राय लेकर यहां बताए गए कुछ आहार का प्रयोग कर सकते हैं|

आहार किस तरह वेस्टिबुलर विकार (vestibular disorders) को प्रभावित करता है?

कान के भीतरी हिस्से में होने वाले कुछ कारणों की वजह से चक्कर की समस्या उत्पन्न होती है| यह संक्रमण,
मशीनी समस्या (mechanical problems) जैसे कि कैल्शियम कार्बोनेट कणों का विघटन (dislodgement of calcium carbonate particles – otoliths), सूजन, कार्यप्रणाली में विकार, कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र, तथा कान की अंदरुनी हिस्से में दबाव, की वजह से होता हैं|

बीमारी की इस अवस्था में उचित दवा तथा इलाज की आवश्यकता है| आहार में आवश्यक बदलाव करके इलाज और भी प्रभावी बनाया जा सकता है|

चक्कर की समस्या को नियंत्रित करने के लिए आहार

निम्न आहार से बचें

  • अत्यधिक शक्कर तथा नमक युक्त पेय पदार्थ और सोडा से बचें|
  • कैफीन का प्रयोग – कैफीन आधारित पेय जैसे कि कॉफी, चाय, चॉकलेट, एनर्जी ड्रिंकस और कोला से बचें| चक्कर की समस्या से पीड़ित मरीजों के कान में उत्पन्न होने वाली सनसनी को बढ़ा सकते हैं| यह भी पाया गया है की कैफीन की वजह से कोशिकाओं का ध्रुवीकरण (cell depolarization) होता है जिसकी वजह से कोशिकाएं आसानी से उत्तेजित हो जाती है| जो मरीज मेनियार्स के रोग तथा वेस्टिबुलर माइग्रेन की समस्या से पीड़ित है, उन्हें कैफीन के प्रयोग को काफी नियंत्रित करना चाहिए|
  • अत्यधिक नमक का प्रयोग – नमक की वजह से शरीर में अत्यधिक मात्रा में द्रव्य इकट्ठा हो जाता है और यह जल संतुलन तथा दबाव को प्रभावित करता है| आहार में नमक की अत्यधिक मात्रा, अंदरुनी समस्थिति (internal homeostasis) के कर्ण कोटर प्रणाली (vestibular system) को प्रभावित करता है| अत्यधिक नमक युक्त आहार जैसे कि सोया सॉस, चिप्स, पॉपकॉर्न, पनीर, अचार, पापड़ तथा डिब्बाबंद आहार, की इस्तेमाल से बचना चाहिए| आप अपने साधारण नमक को बदलकर, लो सोडियम (low sodium) युक्त नमक का इस्तेमाल करें क्योंकि चक्कर की समस्या के लिए सोडियम ही मुख्य वजह है|
  • तंबाकू तथा सिगरेट का प्रयोग – निकोटिन रक्त धमनियों को संकुचित करता है| कर्ण कोटर से संबंधित समस्याएं जो संवहनी संकुचन (vascular constriction) की वजह से होती है, वह तंबाकू तथा सिगरेट के इस्तेमाल से और भी गंभीर हो सकती है| निकोटिन दिमाग में रक्त के बहाव को कम कर देता है और सुधार प्रक्रिया को बाधित करता है|
  • अल्कोहल का इस्तेमाल – अल्कोहल पाचन प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करता है, शरीर का निर्जलीकरण करता है तथा इसका सेवन चयापचय, मस्तिष्क तथा कान के भीतरी हिस्सों के लिए खतरनाक है| चक्कर की समस्या से पीड़ित मरीजों में, अल्कोहल का सेवन, गंभीर सिर का दर्द, माइग्रेन, उल्टी और मतली को ट्रिगर कर सकता है। अल्कोहल मस्तिष्क के केंद्रीय प्रसंस्करण में हस्तक्षेप कर कर्ण कोटर से संबंधित सुधार प्रक्रिया (vestibular compensation), तथा सोचने – समझने (cognitive functions) की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है| कान के अंदरूनी हिस्से में स्थित ईयर फ्लूइड डायनेमिक में बदलाव कर चक्कर की समस्या को यह और भी गंभीर कर सकता है| मदिरा के सेवन से होने वाले माइग्रेन की समस्या एक जाना माना तथ्य है|
  • प्रसंस्कृत खाद्य और मांस
  • डबल रोटी और पेस्ट्री
  • तले हुए खाद्य पदार्थ
  • अचार और किण्वित खाद्य पदार्थ चक्कर के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

ऊपर बताए गए आहार चक्कर की समस्या को और भी गंभीर करते पाए गए हैं| इन आहार से बचकर आप अपनी स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं|

निम्न आहार शामिल करें

ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें जो एंटी-इंफ्लेमेटरी हैं और शरीर को डेटॉक्स करते हैं। ये कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद कोशिकाओं के सूजन को कम करते हैं, उन्हें ठीक करते हैं तथा स्वस्थ नई कोशिकाओं का निर्माण सुनिश्चित करते हैं|

    • खूब पानी पिए
    • पोटैशियम से भरपूर टमाटर, शरीर में मौजूद अतिरिक्त तरल पदार्थ को शरीर से बाहर निकलता है|
    • ये एंटीऑक्सिडेंट, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं और एंटी-इंफ्लेमेटरी भी होते हैं। नट्स शरीर और आंतरिक कान में रक्त परिसंचरण में सुधार करते हैं, जिससे अतिरिक्त तरल पदार्थ के कारण बनने वाला दबाव कम होता है| हालांकि, वेस्टिबुलर माइग्रेन की स्थिति में, नट्स के सेवन से बचना चाहिए।
      अदरक चक्कर और उससे संबंधित लक्षणों जैसे कि उल्टी, सिर का भारीपन, और मितली के एहसास को कम करता है। चूंकि अदरक मधुमेह और रक्त पतला करने वाली दवाओं के साथ हस्तक्षेप करता है, इसलिए इन रोगियों के लिए अदरक का इस्तेमाल उचित नहीं है।
    • विटामिन बी और सी, जस्ता, मैग्नीशियम से भरपूर भोजन तंत्रिका से संबंधित क्षति को ठीक करती हैं और रक्त परिसंचरण में सुधार करते है।

यहां बताए गए आहार कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं। हर किसी का शरीर अलग-अलग खाद्य पदार्थों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है।

अगर आप एक ऐसी डायरी का इस्तेमाल करें जिसमें आप उन सभी आहार को वर्णित करें जिसकी वजह से आप में चक्कर की समस्या उत्पन्न होती है, तो आपको बहुत मदद मिलेगा| समय के साथ आपके पास खाद्य पदार्थों की अपनी व्यक्तिगत सूची तैयार हो जाएगी जो आपको चक्कर की समस्या से बचने में सहायता करेगी|

दवाओं के इस्तेमाल से चक्कर की समस्या

अगर कुछ दवाओं के सेवन की वजह से चक्कर की समस्या उत्पन्न होती है, तो अपने डॉक्टर को सूचित करें और उस दवा का प्रयोग तुरंत बंद कर दे| लेकिन ऐसा करने से पहले सुरक्षित वैकल्पिक दवाओं के बारे में पता कर ले ताकि आपके स्वास्थ पर कोई बुरा प्रभाव ना पड़े| दवाएँ जैसे कि एंटी-डिप्रेसेंट, शामक, दर्द-निवारक, मांसपेशियों को आराम देने वाले, एंटी-हाइपरटेन्सिव, एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड भी चक्कर के संभावना को बढ़ा सकते हैं|

सुधार की दिशा में सही कदम उठाते हुए जब आप अपने दैनिक आहार में परिवर्तन लाते हैं तो भी चिकित्सा सहायता के महत्व को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। यह जरूरी है कि आप चक्कर से संबंधित विशेषज्ञ की राय लें और ऐसे समाधान को ढूंढे जिससे आपको लंबे समय तक चक्कर की समस्या से आराम मिले|

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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