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बीटाहिस्टाइन (वैर्टिन)

कई अन्य ब्रांड नामों के तहत उपलब्ध है जैसे कि बीटावर्ट (Betavert), बी-स्टिल (B-stil), बीटाहिस्ट (Betahist), वैर्टिस्टार (Vertistar), सर्क (Serc), हाईसर्क (Hiserk), बीटासर्क (Betaserc), वर्गो (Vergo) आदि।

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बीटाहिस्टाइन (वैर्टिन)

बीटाहिस्टाइन एक दवा है जो आमतौर पर वर्टिगो (vertigo), चक्कर आने, अस्थिरता या असंतुलन से पीड़ित रोगियों को दी जाती है। यह अक्सर मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) के मरीज़ोंको दी जाती है। मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंतरिक कान के तरल पदार्थ का दबाव बढ़ जाता है। मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) के लक्षणों में वर्टिगो (vertigo) के दौरे, एक कान में श्रवण हानि के साथ घण्टियाँ बजने की अनुभूति शामिल हैं। बीटाहिस्टाइन को पहली बार 1970 में मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) के इलाज के लिए पंजीकृत किया गया था। यह कई ब्रांड नामों के तहत उपलब्ध है जैसे कि वैर्टिन (Vertin), बीटावर्ट (Betavert), बी-स्टिल (B-stil), बीटाहिस्ट (Betahist), वैर्टिस्टार (Vertistar), सर्क (Serc), हाईसर्क (Hiserk), बीटासर्क (Betaserc), वर्गो (Vergo) आदि।

मात्रा

बीटाहिस्टाइन व्यावसायिक रूप से 8, 16, 24 और 48 मिलीग्राम की मात्राओं में उपलब्ध है। ऐसा माना जाता है इसके प्रभाव इसकी मात्रा पर निर्भर करते हैं, जिसका अर्थ है कि इसकी जितनी अधिक खुराक दी जाएगी, यह उतनी अधिक प्रभावी होगी।

विशेष सावधानियाँ

निम्नलिखित अवस्थाओं या स्थितियों में बीटाहिस्टाइन का सेवन करने से बचना चाहिए या उसके सेवन की सलाह सावधानी के साथ दी जानी चाहिए:

  • 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
  • गर्भावस्था
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • ब्रोन्कियल अस्थमा (Bronchial Asthma) / दमा
  • पेप्टिक अल्सर (Peptic ulcer) / पेट में अल्सर
  • फीयोक्रोमोसाइटोमा (Pheochromocytoma)

दुष्प्रभाव

हिस्टामाइन के बढ़े हुए स्तरों के कारण बीटाहिस्टाइन ऐलर्जी, त्वचा से संबंधित अतिसंवेदनशीलता जैसे झनझनाहट होना और सुन्न पड़ जाना, साँस छोटी हो जाना और बढ़ी हुए अम्लता का कारण बन सकती है।

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव

आपको अपने चिकित्सक को उन सभी दवाओं के बारे में सूचित करना चाहिए जिन्हें आप ले रहे हैं क्योंकि अन्य दवाएँ बीटाहिस्टाइन के साथ पारस्परिक क्रिया कर सकती हैं। बीटाहिस्टाइन एक हिस्टामाइन एनालॉग (histamine analogue) है जिसकी H1 रिसैप्टर ऐगोनिस्ट (H1 receptor agonist) और H3 रिसेप्टर ऐन्टागोनिस्ट (H3 receptor antagonist) भूमिका है। इस प्रभाव के कारण, इसे सिन्नारिज़ाइन (Cinnarizine) जैसे H1 रिसैप्टर ऐन्टागोनिस्ट (H1 receptor antagonist) के साथ नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे दोनों दवाओं की दक्षता कम हो जाएगी।

बीटाहिस्टाइन को आपके डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा में उनके द्वारा निर्धारित अवधि तक लिया जाना चाहिए। अपने डॉक्टर को पहले से मौजूद किसी भी चिकित्सा स्थिति के बारे में हमेशा सूचित करें और उनसे निम्नलिखित जानकारी साझा करें:

  • वर्तमान में आप जो भी दवा ले रहे हों
  • चिकित्सा स्थिति की रिपोर्ट
  • कोई भी श्वसन संबंधी समस्या
  • कोई भी गैस्ट्रिक या आंतों की समस्या
  • किसी भी दवा से एलर्जी

कार्य प्रणाली

बीटाहिस्टाइन का सक्रिय संघटक बीटाहिस्टाइन हाइड्रोक्लोराइड (Betahistine hydrochloride) या बीटाहिस्टाइन डीमैसिटेट (Betahistine demesytate) है। बीटाहिस्टाइन उन कुछ ज्ञात दवाओं में से एक है जिनके बारे में कहा जाता है कि वह आंतरिक कान के माइक्रोसर्कुलेशन (microcirculation) को सुधारती हैं। यह दवा हिस्टामाइन ऐनालॉंग (histamine analogue) की तरह 2 तरीक़ों से कार्य करती है

  1. H1 रिसैप्टर्स की ऐगोनिस्ट, और
  2. H3 रिसैप्टर्स की ऐण्टागोनिस्ट।

H1 रिसैप्टर्स पर यह कम प्रभाव डालती है लेकिन H3 रिसैप्टर्स पर मजबूत प्रभाव डालती है। अध्ययनों से पता चला है कि आंतरिक कान में रक्त की आपूर्ति में वृद्धि से, कॉक्लीयर (cochlear) और वैस्टिबुलर (vestibular) दोनों हिस्सों में, बीटाहिस्टाइन कान के आंतरिक भाग के तंत्र में तरल पदार्थों के उत्पादन और पुनरुत्थान को संतुलित करने में मदद कर सकती है। इस प्रभाव की वजह से बीटाहिस्टाइन मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) के प्रबंधन में उपयोगी है। यह रोग ऐंड़ोलिम्फेटिक हाइड्रॉप्स (endolymphatic hydrops) के साथ या कान के भीतरी भाग के अंदर बढ़े हुए ऐंड़ोलिम्फेटिक दबाव से जुड़ा हुआ है और इसके परिणाम वर्टिगो के दौरों के साथ टिन्निटस और घटती बढ़ती श्रवण हानि हैं। यदि मैनीएरेज़ रोग (Meniere’s disease) का उचित और समय पर इलाज नहीं कराया जाता है, तो यह बढ़कर प्रभावित कान में स्थाई श्रवण हानि के साथ लगातार बनी रहने वाली अस्थिरता का रूप ले सकता है।

बीटाहिस्टाइन के सेवन से ऊंघ आने की समस्या नहीं होती जो कि वर्टिगो (vertigo) के प्रबंधन में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश वैस्टिबुलर सप्रैसेंट्स (vestibular suppressants) का एक आम दुष्प्रभाव है। इस कार्य की वजह से, इसकी केंद्रीय क्षतिपूर्ति तंत्र (central compensation mechanism) को खतरे में डालने की संभावना कम होती है।

हाल ही में कुछ शोध पत्रों ने कान के संतुलन अंगों पर बीटाहिस्टाइन के परिधीय प्रभावों का वर्णन किया है। ऐसा कहा जाता है कि इससे इस क्षेत्र से संवेदी इनपुट (sensory input) कम हो जाता है जिससे उत्तेजक प्रतिक्रिया (excitatory response) कम हो जाती है।

बीटाहिस्टाइन वर्टिगो (vertigo) के प्रबंधन में उपयोग की जाने वाली अन्य दवाओं से इस प्रकार अलग है कि यह केन्द्रीय स्नायुतंत्र (central nervous system) की कार्य प्रणाली, जो कि जो वैस्टिबुलर (vestibular) विकारों की से स्वास्थ्य लाभ के लिए महत्वपूर्ण है, को नहीं दबाती।

उपलब्धता

बीटाहिस्टाइन का यूरोप और एशिया में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह USA में उपलब्ध नहीं है क्योंकि इसको FDA की मंजूरी नहीं प्राप्त है।

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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