

टिनिटस एक या दोनों कानों में बजने या दूसरे तरह के शोर की अनुभूति है, जब कोई बाहरी आवाज मौजूद नहीं होती है। मरीज अक्सर इन आवाजों को निरंतर या रुक-रुक कर होने वाली भिनभिनाहट, सीटी, चहचहाहट या फुफकार के रूप में बताते हैं। कुछ मरीजों को फुसफुसाहट, गुनगुनाहट या दूसरी आवाजें सुनाई दे सकती हैं। इन आवाजों की मात्रा और पिच अलग-अलग हो सकती है और शांत वातावरण में ज़्यादा ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। जबकि टिनिटस सीधे सुनने की क्षमता को नुकसान नहीं पहुँचाता है, यह कॉन्सेंट्रेशन और सुनने की क्षमताओं को ख़राब कर सकता है, अगर इसका ट्रीटमेंट न किया जाए तो संभावित रूप से मनोवैज्ञानिक समस्याओं का कारण बन सकता है।



टिनिटस वर्टिगो या सिर घूमने वाले डिसॉर्डर्स से भी जुड़ा हो सकता है और यह किसी अंदर मौजूद बिमारी का संकेतक भी हो सकता है।
ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव टिनिटस


विजुअल एनालॉग स्केल: मरीज 0-10 के पैमाने पर कान के अंदर होने वाले शोर की तीव्रता को ईवैल्यूऐट करते हैं।
ऑडियोमेट्री: सुनने की क्षमता का आकलन करता है और सुनने की क्षमता में कमी के प्रकार और गंभीरता की पहचान करता है।
टिनिटस को मैच करना: मरीज़ उन आवाजों की पहचान करते हैं जो उनके द्वारा अनुभव किए जाने वाले टिनिटस से मिलती-जुलती हैं, जिससे फ्रीक्वन्सी के स्तर को तय करने में मदद मिलती है।
लाउडनेस मैच टेस्ट: मरीज़ उन आवाजों की तीव्रता को मैच करते हैं, जो टिनिटस आवाज लगते हैं, जिससे टिनिटस की सीमा को समझने में मदद मिलती है।
यूस्टेशियन ट्यूब फ़ंक्शन टेस्ट के साथ इम्पीडन्स ऑडियोमेट्री: कान के बीच के हिस्से का दबाव, स्टेपेडियल रिफ्लेक्स और ईटी फ़ंक्शन तय करता है।

शरीर के अंदर मौजूद कारण:
दवाएँ:
टूल्स: