वर्टिगो की दवाएं

वर्टिगो की रोकथाम करने वाली आम दवाओं की सूची और साथ ही उनके उपयोग, निहितार्थ, रचनाएँ, साइड-इफैक्ट्स और सावधानियां

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वर्टिगो के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं

वर्टिगो परेशानी से भरी एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोगी अस्थिर महसूस करता है या फिर उसे चक्कर आने सा आभास होता है। इस आभास के साथ साथ जी मचलाता है और उल्टी भी आती है। कई रोग वर्टिगो या असंतुलन का कारण बन सकते हैं और वर्टिगो की स्थिति का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए उसका सही कारण जानना बहुत महत्वपूर्ण है।

हमारे कान सुनने के साथ-साथ शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए भी ज़िम्मेदार होते हैं। कान, मस्तिष्क एवं केंद्रीय स्नायु तंत्र से संबंधित विकार, सिस्टैमिक (systemic) रोग, पौष्टिकता की कमी, चोट या संक्रमण, एवं कुछ निश्चित मानसिक समस्याएं वर्टिगो तथा असंतुलन के कुछ सबसे आम कारणों में से एक हैं।

इन मरीजों का उचित उपचार रोग के मूल कारण को पहचानकर ही संभव हो सकता है। चूंकि वर्टिगो का मरीज़ अस्थिर महसूस करता है तथा वह संतुलन खो देने और गिरने से भयभीत भी हो सकता है, इसलिए ऐसे लोगों में अक्सर व्याकुलता का स्तर बहुत बढ़ा हुआ होता है। मरीज़ की व्याकुलता को दूर करने के लिए उसको रोग की वर्तमान स्थिति के साथ साथ उसका मूल कारण समझाना भी ज़रूरी है। वर्टिगो को नियंत्रित करने के लिए इसे कुछ दवाओं के साथ जोड़ा जा सकता है।

चक्कर आने की अनुभूति को कम करने, जी मचलाने और उल्टी आने को नियंत्रित करने, और वर्टिगो के कारण होने वाली व्याकुलता को कम करने के लिए कई दवाओं का उपयोग किया गया है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की सूची नीचे दी गई है। हालांकि इस बात पर दोबारा ज़ोर दिया जा रहा है कि लक्षणों को दबाने की बजाय वर्टिगो की उत्पत्ति के मूल कारण का इलाज करना ज़्यादा फायदेमंद होगा।

 
वर्टिगो को दबाने वाली ज़्यादातर दवाओं को वर्टिगो का गंभीर दौरा पड़ने के दौरान छोटी अवधियों के लिए ही लेने की सलाह दी जाती है। वर्टिगो के गंभीर प्रकरण के बाद इन दवाओं को रोक दिया जाना चाहिए क्योंकि जब ये दवाएं लंबे समय तक दी जाती हैं तो ये केंद्रीय स्नायु तंत्र द्वारा शुरू किए गए स्वास्थ्य लाभ, जिसे कॉम्पैनसेशन (compensation) कहा जाता है, में हस्तक्षेप करती हैं।

आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं:

वर्टिगो के इलाज में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाओं में शामिल हैं:

वर्टिगो या चक्कर आने को दबाने के लिए जो दवाइयां इस्तेमाल की जाती हैं वे दवाएं 3 से 5 दिनों की छोटी अवधि के लिए दी जानी चाहिएं। वैस्टिब्यूलर सप्रैसैंट (vestibular suppressants) दवाएं लंबी अवधि तक देना मरीजों के शुरुआती स्वास्थ्य लाभ के लिए हानिकारक हो सकता है। आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दवाइयों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

बैन्ज़ोडायाज़ैपाइंज़ (Benzodiazepines)

बैन्ज़ोडायाज़ैपाइंज़ (benzodiazepines) - इस वर्ग में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं क्लोनाज़ेपैम (clonazepam), डायाज़ेपैम (diazepam) और लोराज़ेपैम (lorazepam)। ये वैस्टिब्युलर (vestibular) प्रतिक्रियाओं को दबाकर केंद्रीय स्नायु तंत्र के माध्यम से कार्य करती हैं। वैस्टिब्युलर (vestibular) प्रतिक्रियाओं में इन्द्रियों का तालमेल ना बैठने के कारण चक्कर आने का आभास होता है। यह दवाइयां कम अवधि के लिए मरीज़ की व्याकुलता को दूर करने में कारगर होती हैं लेकिन आसक्ति, स्मृति दोष तथा केंद्रीय कॉम्पैनसेशन (compensation) को खतरे में डालने की संभावना के चलते इनका सेवन यथाशीघ्र बंद कर दिया जाना चाहिए।

जिन मरीजों को मायऐसथीनिया ग्रेविस (myasthenia gravis), ब्रौंकाइटिस (bronchitis), क्रौनिक ऑब्सट्रक्टिव पलमनरी डिज़ीज़ (chronic obstructive pulmonary disease (COPD)) एवं स्लीप ऐप्निया (sleep-apnea) है, उन्हें बैन्ज़ोडायाज़ैपाइंज़ (benzodiazepines) का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह दवाएं श्वसन क्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।

बीटाहिस्टाइन (Betahistine)

बीटाहिस्टाइन (betahistine) एक हिस्टामाइन ऐनालॉग (histamine analogue) है जो एक कमज़ोर H 1 ऐगोनिस्ट (H1 agonist) एवं शक्तिशाली H 3 रिसैप्टर ऐंटागोनिस्ट (H3 receptor antagonist) की तरह कार्य करता है। यह दो रूपों में उपलब्ध है - बीटाहिस्टाइन हाईड्रोक्लोराइड (betahistine hydrochloride) और बीटाहिस्टाइन मैसिलेट (betahistine mesilate)। इसका इस्तेमाल मैनिएरेज़ रोग (Meniere's disease) के इलाज में होता है। ऐसा माना जाता है कि यह कान के अंदरूनी हिस्से में रक्त संचार को बढ़ाने में सहायक होती है तथा कॉम्पैनसेटरी (compensatory) प्रक्रिया में सुधार लाती है। लिखित अनुसंधानों में बताया गया है कि बीटाहिस्टाइन (betahistine) बड़ी मात्राओं में लेने पर प्रभावी होती है।

इस लवण पदार्थ को ब्रॉन्कायल अस्थमा (bronchial asthma) तथा गैस्ट्रिक अल्सर (gastric ulcer) से पीड़ित उन मरीजों को देने से बचना चाहिए जिनमें हिस्टामाइन (histamine) की बढ़ी हुई मात्रा स्थिति को और बद्तर कर सकती है।

सिन्नारिज़ाइन (Cinnarizine)

सिन्नारिज़ाइन (cinnarizine) एक ऐंटीहिस्टामाइन (antihistamine) तथा कैल्शियम चैनल ब्लॉकर (calcium channel blocker) है जो अंदरूनी कान के रिसैप्टर्स (receptors) की जलन को कम करके इन्द्रियों के बीच तालमेल ना बनने को कम करने में सहायता करता है, रक्त धमनियों को सिकुड़ने से बचाता है तथा लाल रक्त कोशिकाओं की लैक्सिबिलिटी (lexibility) को बेहतर बनाकर सुदूरस्थ अंगों तक रक्त के प्रवाह को सुधारता है और इस प्रकार कार्य करता है। यह वर्टिगो के गंभीर दौरों में कारगर होता है। यह केंद्रीय स्नायु तंत्र में स्थित उल्टी होने के केंद्र को भी दबा देता है। हालांकि इसे लंबी अवधियों तक लेने का परामर्श नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे दवा द्वारा होने वाला पार्किंसन रोग हो सकता है। सिन्नारिज़ाइन (cinnarizine) मोशन सिकनैस (motion sickness) से बचाव में भी काम आती है।

डायमैनहाइड्रिनेट (Dimenhydrinate)

डायमैनहाइड्रिनेट (dimenhydrinate) एक ऐंटि हिस्टामाइन (anti histamine) है जो बिना डॉक्टर के पर्चे के भी मिल जाती है। यह जी मचलाने तथा उल्टी आने, जो कि वर्टिगो से संबंधित लक्षण हैं, को नियंत्रित करने की एक प्रभावी दवा है। इसका उपयोग केवल गंभीर लक्षण सामने आने पर ही किया जाता है। सिर चकराने के साथ ही उल्टी आने को नियंत्रण में लाने के लिए अब ऐसी दवाओं के मिश्रण उपलब्ध हैं जिनमें डायमैन्हाईड्रिनेट (dimenhydrinate) के साथ सिन्नारिज़ाइन (cinnarizine) हो। डायमैन्हाईड्रिनेट (dimenhydrinate) के कारण मुंह में सूखापन तथा सुस्ती महसूस हो सकते हैं।

इसलिए इस दवा का सेवन करने वाले मरीजों को गाड़ी चलाने से बचना चाहिए। ग्लॉकोमा (glaucoma) या यूरिनरी (urinary) विकारों वाले मरीजों को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए।

मैक्लिज़ाइन (Meclizine)

मैक्लिज़ाइन (meclizine) ऐंटि हिस्टामाइनिक (anti-histaminic) वर्ग की एक दवा है। यह गंभीर दौर में वर्टिगो को कम करने में कारगर होती है। केवल यही एक ऐसी ऐंटि वर्टिगो (anti-vertigo) दवा है जिसका सेवन गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान भी सुरक्षित होता है। यह मोशन सिकनैस (motion sickness) तथा सी सिकनैस (sea sickness) का इलाज करने में भी काम आती है।

अन्य ऐंटि हिस्टामाइन (antihistamine) दवाओं की तरह ही मैक्लिज़ाइन (meclizine) से भी ऊंघ आ सकती है व मुंह सूखा पड़ सकता है।

मैटाक्लोप्रोमाइड (Metaclopromide), प्रोमैथाज़ाइन (Promethazine) एवं ऑन्डैन्स्टैरॉन (Ondansterone)

मैटाक्लोप्रोमाइड (metaclopromide), प्रोमैथाज़ाइन (promethazine) तथा ऑन्डैन्स्टैरॉन (ondansterone) जी मचलाने और उल्टी आने को नियंत्रित करने के लिए दी जाने वाली दवाएं हैं। इन दवाओं के ज़्यादा कारगर होने के लिए मरीजों को इनको लेने के कम से कम 30 मिनट बाद तक मुंह से कुछ भी नहीं खाना चाहिए।

पिरासेटैम (Piracetam)

पिरासेटैम (piracetam) एक नूओट्रॉपिक एजेंट (nootropic agent) है जो न्यूरोट्रांसमिटर गामा अमीनो ब्यूटायरिक ऐसिड (neurotransmitter gamma-amino butyric acid (GABA)) का व्युत्पतिलब्ध है। इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी (neuroplasticity) को सुधारने वाला तथा न्यूरोप्रोटैक्टिव (neuroprotective) प्रभाव प्रदान करने वाला कहा गया है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के जुड़ाव को कम करता है, छोटी रक्त धमनियों की ऐंठन रोकता है, और माइक्रोसर्कुलेशन (microcirculation) को बेहतर बनाता है। इसे संज्ञानात्मक क्षमता को बेहतर बनाने वाला भी कहा गाय है।

ऊपर वर्णित दवाएं वर्टिगो के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली आम दवाएं हैं। इनके अलावा कई और भी दवाइयां हैं जिनका उपयोग कुछ निश्चित स्थितियों या अवस्थाओं के इलाज के लिए होता है और जिनका इस्तेमाल गहन मूल्यांकन के बाद शुरू किया जा सकता है। वैस्टिब्यूलर न्यूराइटिस (vestibular neuritis), लेबिरिंथाइटिस (labyrinthitis) एवं अंदरूनी कान के ऑटो इम्यून रोग (auto-immune inner ear disease) के मरीजों को स्टेरॉइड (steroids) भी दिए जा सकते हैं।

 
लूनैरिज़ाइन (lunerizine), प्रोप्रैनोलॉल (propranolol), ऐमीट्रिप्टालीन (amitryptaline), डिवैलप्रोऐक्स सोडियम (divalproex sodium) या टोपिरामेट (topiramate) जैसी दवाओं के साथ ऐंटी माईग्रेन प्रोफिलैक्सिस (anti-migraine prophylaxis) की ज़रूरत पड़ सकती है। यह प्रोफिलैक्सिस (prophylaxis) आयु, बॉडी मास इंडेक्स (B M I), लक्षणों की गंभीरता, अन्य संबंधित विकार जैसे हाइपर टेंशन (hypertension), प्रोस्ट्रेट ग्रंथि का बढ़ जाना (prostrate enlargement), ग्लौकोमा (glaucoma) इत्यादि के अनुसार तैयार किया गया होना चाहिए। वैस्टिब्युलर पैरॉक्सिसमिया (vestibular paroxysmia), जो संतुलन तंत्रिका के न्यूरोवैस्क्युलर कंप्रेशन (neurovascular compression) के कारण अनेक लघु अवधि के चक्कर आने के दौरों के रूप में सामने आता है, का इलाज कार्बामीज़ैपाइन (carbamezepine) है।

दवाइयों के साथ इलाज में सहायक के तौर पर वैस्टिब्युलर रीहैबिलिटेशन (vestibular rehabilitation) की भी ज़रूरत पड़ सकती है। यह रीहैबिलिटेशन या पुनर्वासन संतुलन तंत्र के अन्तर्गत आने वाले जिस अंग में खराबी है, उसके अनुसार लक्षित एवं विकसित होने वाला होना चाहिए।

BPPV, जो कि सभी आयु वर्गों में वर्टिगो के कुछ सबसे आम कारणों में से एक है, में किसी भी प्रकार के चिकित्सकीय इलाज की ज़रूरत नहीं होती। यह कैल्शियम कार्बोनेट (calcium carbonate) से युक्त ऑटोलिथ्स (otoliths) के अंदरूनी कान में घुस जाने और संतुलन तंत्रिका के कार्य को बाधित करने के कारण होता है। इसका इलाज ऐप्लेज़ (Epley’s), सीमौंट्स (Semont’s) तथा बारबेक्यू मैन्यूवर्ज़ (Barbeque maneuvres) जैसी लिबरेटरी पद्धतियों (liberatory procedures) से किया जाता है।

डॉ अनीता भंडारी

डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है। डॉ अनीता भंडारी एक वरिष्ठ न्यूरोटॉलिजिस्ट हैं। जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से ईएनटी में पोस्ट ग्रेजुएट और सिंगापुर से ओटोलॉजी एंड न्यूरोटोलॉजी में फेलो, डॉ भंडारी भारत के सर्वश्रेष्ठ वर्टिगो और कान विशेषज्ञ डॉक्टरों में से एक हैं। वह जैन ईएनटी अस्पताल, जयपुर में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़ी हुई हैं और यूनिसेफ के सहयोग से 3 साल के प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं, जिसका उद्देश्य 3000 से अधिक वंचित बच्चों के साथ काम करना है। वर्टिगो और अन्य संतुलन विकारों के निदान और उपचार के लिए निर्णायक नैदानिक ​​उपकरण जयपुर में न्यूरोइक्विलिब्रियम डायग्नोस्टिक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने वीडियो निस्टागमोग्राफी, क्रैनियोकॉर्पोग्राफी, डायनेमिक विज़ुअल एक्यूआई और सब्जेक्टिवेटिव वर्टिकल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ अनीता भंडारी ने क्रैनियोकॉर्पोग्राफी के लिए अपने एक पेटेंट का श्रेय दिया है और वर्टिगो डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए चार और पेटेंट के लिए आवेदन किया है। वर्टिगो रोगियों का इलाज करने के लिए वर्चुअल रियलिटी का उपयोग करके अद्वितीय वेस्टिबुलर पुनर्वास चिकित्सा विकसित की है। उन्होंने वेस्टिबुलर फिजियोलॉजी, डायनेमिक विज़ुअल एक्युइटी, वर्टिगो के सर्जिकल ट्रीटमेंट और वर्टिगो में न्यूरोटोलॉजी पाठ्यपुस्तकों के लिए कठिन मामलों पर अध्यायों का लेखन किया है। उन्होंने वर्टिगो, बैलेंस डिसऑर्डर और ट्रीटमेंट पर दुनिया भर में सेमिनार और ट्रेनिंग भी की है।

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