

लेबिरिंथाइटिस अंदर के कान के संक्रमण के कारण होता है, जिससे सूजन होती है जो वेस्टिबुलोकोक्लियर नस को नुकसान पहुंचाती है। यह नस अंदर के कान से दिमाग तक सुनने और संतुलन से संबंधित संकेतों को पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। अंदर का कान, या लेबिरिंथ, इन कार्यों के लिए जिम्मेदार फ्लूइड से भरी थैलियों और कनाल से मिलकर बना होता है। कोक्लीया, एक घोंघा (स्नैल) के आकार का, फ्लूइड से भरा ढांचा है, जो सुनने के लिए बहुत जरूरी है, जबकि वेस्टिबुलर भाग, जिसमें तीन सेमी-सर्कुलर कनाल और दो थैलियों जैसा स्ट्रक्चर (यूट्रिकल और सैक्यूल) शामिल हैं, सिर को हिलाने से संबंधी जानकारी देकर संतुलन को मैनेज करता है। लेबिरिंथाइटिस कोक्लीअर और वेस्टिबुलर दोनों कॉम्पोनेंट को बाधित करता है, जिससे सुनने की क्षमता कम हो जाती है और असंतुलन होता है।



आँखों को फोकस करने में मुश्किल: खास तौर पर सिर को हिलाते समय।


बिल्कुल सही डयाग्नोसिस में कई वेस्टिबुलर टेस्ट शामिल हैं, जिनमें यह शामिल हैं:
ऑडियोमेट्री: सुनने की क्षमता किस हद तक खराब हुई है यह पता लगाने के लिए सुनने की क्षमता को टेस्ट करता है।

सिमटम का मैनेजमेंट
वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन
अक्यूट सिमटम कम होते ही वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन शुरू कर देना चाहिए। इस थेरेपी से दिमाग को संतुलन से जुड़े कार्यों में होने वाले बदलाव के अनुकूल बनने में मदद मिलती है, जिसे सेंट्रल काम्पन्सेशन के नाम से जाना जाता है।
व्यायाम का उद्देश्य:
मरीज की स्थिति और सुधार के आधार पर व्यक्तिगत संतुलन अभ्यास की सिफारिश की जाती है। इन अभ्यासों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और प्रभावी बनाने के लिए खास निर्देशों के साथ क्लीनिकल मार्गदर्शन में दिन में दो से तीन बार किया जाना चाहिए।