बार-बार पूछे जाने वाले कुछ आम सवाल

वर्टिगो की समस्या में व्यक्ति को चक्कर आना या असंतुलन का आभास होता है। मरीज़ इसका वर्णन अलग-अलग प्रकार से कर सकते हैं जैसे कि सर घूमना, चक्कर आना, सर चकराना, असंतुलन, धीरे-धीरे डुलना या फिर गिरने का आभास होना।

वर्टिगो संतुलन तंत्र के विभिन्न प्रकार के विकारों द्वारा हो सकता है। आमतौर पर ये कान के भीतरी हिस्से की समस्याओं के कारण होता है। कभी-कभार केंद्रीय स्नायु तंत्र को, प्रणालीगत विकारों जैसे कि अपर्याप्त रुप से नियंत्रित रक्तचाप या डायबिटीज को, या मनोवैज्ञानिक विकारों को भी इसका दोषी ठहराया जा सकता है। इसके सबसे साधारण कारणों में बिनाइन पैरॉक्सिस्मल पोज़िश्नल वर्टिगो (BPPV), मैनिएरेज़ रोग (Meniere’s disease), वैस्टिब्युलर माईग्रेन (Vestibular migraine), लैबिरिंथाईटिस (Labyrinthitis),
वैस्टिब्युलर न्यूराइटिस (Vestibular neuritis), हैड इंजरी स्ट्रोक (head injury stroke) इत्यादि विकार शामिल हैं।

BPPV वर्टिगो के सबसे आम कारणों में से एक है। BPPV का विस्तृत नाम बिनाइन पैरॉक्सिस्मल पोज़िश्नल वर्टिगो है। इस रोग में रोगी को बिस्तर से उठने या बैठने पर व कुछ स्थितियों में सिर को मोड़ने पर चक्कर आने की शिकायत करता है। BPPV अंदर कान में अपने स्थान से हट चुके कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टलों की वजह से होता है। इसका इलाज कान के भीतर क्रिस्टलों के स्थान को पहचान कर कुछ निश्चित व्यायामों की मदद से उन्हें पुनः अपने स्थान पर करने से होता है।

वी ऐन जी (VNG) या वीडियो निस्टैग्मोग्राफी ऐसे मरीज़ों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है जिन्हें चक्कर आने की शिकायत हो। इसके अंतर्गत विभिन्न परीक्षणों में आंखों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए तेज़ रफ्तार इंफ्रारेड कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। इन परीक्षणों से डॉक्टर संतुलन तंत्र के विभिन्न अंगों की कार्य विधि का तथा मस्तिष्क से उनके जोड़ों का निरीक्षण कर पाते हैं।

वर्टिगो कान एवं मस्तिष्क के विभिन्न रोगों की वजह से हो सकता है। इसका पूर्ण आकलन करने से इसके कारण का पता लगाया जा सकता है। लेकिन कुछ सामान्य निर्देशों में शामिल हैं _______ से बचना, अंधेरी जगहों में अथवा सीढ़ियों में सावधान रहना। शराब से दूर रहें और अपने कैफीन (चाय या कॉफी) के सेवन को कम करने की कोशिश करें।

वर्टिगो का इलाज मौजूद है। किसी मरीज़ के वर्टिगो रोग के मुख्य कारण की पहचान कर लेने से डॉक्टर यह निर्णय ले पाते हैं कि अपने वर्टिगो पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए उस मरीज़ को दवाओं की ज़रूरत है या व्यायाम की।

विस्तृत जानकारी साझा करने के बाद वर्टिगो के मरीज़ को विस्तृत वैस्टिब्युलर (vestibular) मूल्यांकन से गुज़रना चाहिए। इसमें वीडियो निस्टैगमोग्राफी (Videonystagmography), वीडियो हैड इंपल्स परीक्षण (Video Head Impulse Test), सब्जैक्टिव विज़ुअल वर्टिकल तथा डायनैमिक विज़ुअल ऐक्यूइटी (Subjective Visual Vertical and Dynamic Visual Acuity) जैसे परीक्षण शामिल होंगे। कुछ मरीज़ों के मस्तिष्क के ऐम आर आई (MRI) की आवश्यकता भी पड़ सकती है। सुनने की क्रिया को मापने के लिए ऑडियोमैट्रिक परीक्षण (Audiometric test) भी करवाया जाना चाहिए।

ऊंची आवाज़ में संगीत सुनना या शोर भरी ध्वनियों को लगातार सुनना कान को क्षतिग्रस्त कर सकता है। हालांकि सामान्यतया इससे वर्टिगो नहीं हो सकता।

वर्टिगो का इलाज संभव है। आपके डॉक्टर द्वारा कई सारी जांच करने पर आपके वर्टिगो का कारण तय हो पाएगा। कारण सुनिश्चित हो जाने के बाद दवाइयों से या पुनर्वासन व्यायामों (rehabilitation exercises) के माध्यम से इलाज का परामर्श दिया जाएगा। (वर्टिगो के) कुछ गिने-चुने प्रकरणों में ही शल्य क्रिया की आवश्यकता पड़ती है।

चक्कर आने की शिकायत करने वाले मरीज़ों को संतुलन के लिहाज़ से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए वैस्टिब्युलर रीहैबिलिटेशन (vestibular rehabilitation) बहुत महत्वपूर्ण है। यह मस्तिष्क को संतुलन की क्रिया को सुधारने के लिए वैकल्पिक रणनीतियां तैयार करने में मदद करने के सिद्धांत पर कार्य करता है। वैस्टिब्युलर परीक्षणों द्वारा पहचाने गए संतुलन के नज़रिए से कमज़ोर अंगों के लिए निश्चित वैस्टिब्युलर रीहैबिलिटेशन (vestibular rehabilitation) व्यायाम विकसित करने की ज़रूरत होती है। ऐसा हर व्यायाम पिछले व्यायाम से अधिक चुनौतीपूर्ण होना चाहिए ताकि मरीज़ को कई हफ़्तों तक इन व्यायामों को करने के बाद संतुलन में स्वास्थ्य लाभ हो सके।

चूंकि वर्टिगो केवल एक लक्षण है, इसलिए इसके इलाज के लिए कोई एक निश्चित उपयुक्त या सही दवा नहीं है। इसके लक्षणों को दबाने की बजाए हम इसके मूल कारण को ठीक करने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के तौर पर गंभीर अवस्था वाले वैस्टिब्युलर न्यूराइटिस (vestibular neuritis) का इलाज स्टेरॉइड्स (steroids) द्वारा किया जाता है और उसके बाद वैस्टिब्युलर पुनर्वासन (vestibular rehabilitation) पर ज़ोर दिया जाता है। उसी प्रकार वैस्टिब्युलर माइग्रेन (vestibular migraine) के इलाज के लिए जीवन शैली में परिवर्तनों के साथ-साथ प्रोफाईलैटिक दवाओं (prophylatic drugs) की ज़रूरत होती है। वैस्टिब्युलर पैरॉक्सिस्मिया (vestibular paroxysmia) का इलाज कार्बामेज़पाइन (carbamazepine) से होता है। अतः रोग के आधार पर ही इलाज किया जाता है। वैस्टिब्युलर सप्रैसैंट (vestibular suppressants) जैसे कि मैक्लिज़ाइन (meclizine), सिन्नारिज़ाइन (cinnarizine), प्रोक्लॉरपैराज़ाइन (prochlorperazine) इत्यादि रोग की गंभीर अवस्था में कुछ दिनों के लिए दी जा सकती हैं। हालांकि यह दवाएं पांच दिनों से ज्यादा समय के लिए नहीं दी जानी चाहिएं क्योंकि यह मरीज के स्वास्थ्य लाभ में बाधक बन सकती हैं।

ज़्यादातर वर्टिगो के मरीज़ दवाइयों से या वैस्टिब्युलर रीहैबिलिटेशन (vestibular rehabilitation) से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर लेते हैं। हालांकि कुछ गिने-चुने मामलों में शल्य क्रिया की ज़रूरत भी पड़ सकती है। यह शल्य क्रिया ऐसे ई ऐन टी (ENT) शल्य चिकित्सकों द्वारा या न्यूरो सर्जनों द्वारा की जाती है जो इसमें अत्यधिक कुशल हों।

वैस्टिब्युलर माइग्रेन (vestibular migraine) के कारण होने वाले वर्टिगो को तनाव संभवतया बद्तर बना सकता है। आसानी से व्याकुल हो जाने वाले व्यक्तियों में फंक्शनल डिज़ीनैस (functional dizziness) जैसी कुछ स्थितियां पाई जाने की अधिक संभावना होती है।

जवान बच्चों से लेकर अधेड़ उम्र के लोगों तथा उम्र दराज़ व्यक्तियों तक सभी आयु के लोगों को वर्टिगो प्रभावित कर सकता है। हालांकि विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में वर्टिगो के मूलभूत कारण अलग हो सकते हैं।

वर्टिगो सामान्यतया भीतरी कान के विकारों के कारण होता है। इसके मरीज़ों का प्रबंधन करने के लिए न्यूरो ऑटोलॉजिस्टों (neuro otologists) को खासतौर पर ट्रेनिंग दी जाती है।

चक्कर आने की शिकायत करने वाले मरीज़ों को जिन व्यायामों को करने का परामर्श दिया जाता है, वे व्यायाम वैस्टिब्युलर रिहैबिलिटेशन (vestibular rehabilitation) कहलाते हैं। कमज़ोरी वाले अंग, आयु तथा संबंधित अक्षमताओं जैसी मरीज़ की विभिन्न ज़रूरतों के अनुसार पुनर्वासन (rehabilitation) की रणनीति को तय करने की ज़रूरत होती है।

स्क्रीन के सामने अत्यधिक समय बिताना और खासकर ऐसी स्क्रीन्ज़ जो चलायमान हों (अर्थात् जिनमें चित्र ऊपर या नीचे चलते हों) या कंप्यूटर पर गेम्स खेलना वैस्टिब्युलर माइग्रेन (vestibular migraine) के कारण होने वाले वर्टिगो को बद्तर बना सकता है।

वर्टिगो के कुछ कारण जैसे कि वैस्टिब्युलर माइग्रेन (vestibular migraine) परिवारों में पाये जा सकते हैं। जो मरीज़ वर्टिगो की शिकायत कर रहे हों, उनके परिवार में वर्टिगो होने का इतिहास, सरदर्द तथा सुनने की शक्ति में कमी जैसे बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

यदि आप को चक्कर आ रहे हों तो गाड़ी चलाने से बचें। चक्कर आने के दौरान किसी भी व्यक्ति की अनैच्छिक क्रियाएं प्रभावित होती हैं जिससे गाड़ी पर नियंत्रण बिगड़ सकता है।

यदि चक्कर के मरीज़ की चेतना क्षीण होती है तो इसका कारण पता लगाने के लिए उस मरीज़ का त्वरित आकलन करना आवश्यक होता है। चेतना की क्षति स्ट्रोक, मिर्गी इत्यादि बीमारियों से संबंधित हो सकती है और इसका जल्द से जल्द इलाज करवाना चाहिए।

संतुलन प्रणाली में किसी भी प्रकार का विकार जिसकी वजह से वर्टिगो, अस्थिरता या असंतुलन हो, मरीज़ की दैनिक क्रियाओं पर असर डालेगा और उसके जीवन की गुणवत्ता को कम कर देगा। इसकी वजह से मरीज़ के आत्मविश्वास में कमी आ सकती है और साथ ही साथ उसमें गिरने का या चलायमान होने का भय भी व्याप्त हो सकता है। वर्टिगो का इलाज करने से मरीज़ के संतुलन तथा आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करने में मदद मिलेगी। चलने का भय मरीज़ को गतिहीन या बैठे रहने वाली जीवनशैली में सीमित कर सकता है और अवसाद (depression) या अतिव्याकुलता भी उत्पन्न कर सकता है।

लगभग 20 से 40% आबादी अपने जीवन में किसी न किसी समय पर चक्कर आने की शिकायत से प्रभावित रही है। भारत की लगभग 5% आबादी को वर्टिगो है। वर्टिगो के अधिकांश मरीज़ों को पता ही नहीं होता कि अपनी हालत के बारे में क्या करें या फिर किस चिकित्सक से परामर्श लें – ई ऐन टी (ENT), न्यूरोलॉजिस्ट (neurologist), ऑप्थैलमोलॉजिस्ट (ophthalmologist), ऑर्थोपीडिशियन (orthopedician), फ़िज़ीशियन (physician) इत्यादि। कई मरीजों का मानना है कि वर्टिगो का कोई इलाज नहीं है और उन्हें इसके साथ ही जीवन बिताना पड़ेगा। इस संदेश को फैलाइए – वर्टिगो का इलाज है।

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